राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद्

सत्य एक है विद्वान लोग विभिन्न प्रकार से इसकी व्याख्या करते हैं|


Truth is one, the scholar explain it differently.


1. प्रस्तावना-औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त समाज विज्ञान

भारतवर्ष में समाज विज्ञान के विषयों का पाठयक्रम, अध्यापन एवं अनुसंधान सब औपनिवेशिक मानसिक जकड़ता से ग्रस्त है। समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, प्रभृति विषयों में भारतवर्ष का समाज प्रतिबिम्बित नहीं होता । न ही यहां के जीवन मूल्य, न दर्शन, न संस्कृति। यूरोप-विशेषकर इंग्लैण्ड के विचारकों ने अपने संमाज को जैसा देखा, उसका मनोविज्ञानिक अनुशीलन कर कुछ सामान्यीकरण करते हुए कुछ सिद्धांत, कुछ नियम बनाये। क्योकि मानवीय मनोविज्ञान में न्यूनाधिक समानता होती है, इसलिये उसमें उन्हें सार्वभौमिक सत्य के दर्शन होते हैं । भारतवर्ष तथा जहां-जहां उनकी सत्ता थी, वहां उन सिद्धांतों को आरोपित करने में उन्हें अप्रतिम सफलता प्राप्त हुई । आगे और पढ़ें

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